आजकल दुनिया की सबसे बड़ी प्रॉब्लम ‘दोस्तों की कमी’ है। यह सच है।
1960 के दशक में, एक आम इंसान के 100 तक पक्के दोस्त होते थे। 1990 के दशक तक, यह संख्या घटकर 50 रह गई। 2020 तक, यह 10 तक पहुँच गई। अब, सिर्फ़ एक सच्चा दोस्त ढूँढ़ना भी एक चैलेंज बन गया है। हाल ही के एक सर्वे के मुताबिक, हमारे देश में 12% लोगों का कोई खास दोस्त नहीं है।
जो लोग पहले दिन में कम से कम एक घंटा दोस्तों के साथ आमने-सामने बिताते थे, अब वे 35 मिनट बिताते हैं। खुलकर बात करने वालों की संख्या कम हो गई है।
1: रिसर्च से पता चलता है कि दोस्तों के बिना अकेलापन उतना ही खतरनाक है जितना एक दिन में 20 सिगरेट पीना। उन्हें स्ट्रेस और डिप्रेशन घेर लेते हैं।
2: अच्छे दोस्तों वाले लोगों को ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी का खतरा बहुत कम होता है।
3: दोस्तों के साथ रहना मज़ेदार होता है। साथ में एक्सरसाइज़ करना, गेम खेलना और नई चीज़ें करना आसान होता है। साथ रहने से इम्यूनिटी बढ़ती है।
दोस्ती बस यूं ही नहीं हो जाती। इसमें टाइम लगता है। एक बार दोस्ती हो जाए, तो उसे बनाए रखने के लिए हर दिन कुछ टाइम चाहिए होता है। जैसे पौधे को पानी, वैसे ही दोस्ती को 'चैट' की ज़रूरत होती है।
1: ऑफिस की दोस्ती सिर्फ़ ज़रूरतों, बाहरी नमस्ते के लिए होती है।
2: सोशल मीडिया की दोस्ती ज़्यादातर टाइमपास होती है।
3: बार और रेस्टोरेंट की दोस्ती सिर्फ़ बातें और हंसी-मज़ाक होती है जो नशे में होने पर गायब हो जाती है।
दोस्ती कम होने का कारण टाइम की कमी है।
हम पैसे कमाने की मशीन बन गए हैं। हम रिश्ते निभाना भूल गए हैं।
अभी बेहतर बनें:
1: अपने दोस्तों को दिन में कम से कम 15 मिनट के लिए कॉल करें। हफ़्ते में कम से कम एक बार मिलें।
2: क्वालिटी टाइम दें: जब मिलें तो उनसे दिल से बात करें।
3: नई दोस्ती करें: लोगों से बात करें।
4: जो दोस्ती आपके पास है उसे बचाएं: छोटी-मोटी बातों पर दोस्ती न छोड़ें। 'सॉरी' और 'थैंक यू' कहने में हिचकिचाएं नहीं। सिर्फ़ अच्छे दोस्त ही हमारी आखिरी सांस तक हमारे साथ चलते हैं। जिस दोस्त से आपने बहुत समय से बात नहीं की है, उसे मैसेज भेजें। कॉल करें। दोस्ती को ज़िंदा रखें।
कहानी के.वी. शर्मा, एडिटर विशाखा संदेश और विशाखापत्तनम दर्पण समाचार पत्रिका विशाखापत्तनम सेल नंबर 7075408286 ने लिखी है। (यह असली कहानी है)

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