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एक सारस्वत ब्राह्मण राजा तलवार से नहीं हारा तो उसे गद्दारों ने हरा दिया

 जब अरब के लुटेरे भारत की तरफ आंख उठाकर देखते तो उन्हें सिंध की सीमा पर एक शेर सारस्वत ब्राह्मण राजा दाहिर सेन तैयार मिलता। जिसके नाम से अरबों में खलबली मच जाती।

कश्मीर से सिंध तक विजय का परचम लहराने वाला ये सारस्वत ब्राह्मण राजा मात्र 12 साल की उम्र में तलवार का धनी बन गया था 

आज इतिहास उस राजा को भूल गया क्योंकि उस राजा ने अरबों के 14 हमलों को नाकाम किया था। 

ओर वो पहला ऐसा शख्स था जिसने मोहम्मद बिन कासिम को रोकने के लिए अपना सीना तान कर खड़ा हो गया था।

जब मोहम्मद बिन कासिम राजा दाहिर सेन को तलवार से हरा नहीं पाया तो अपनों को ही तैयार किया पीठ में खंजर भोंकने के लिए।

जिन लोगों को अपने राज्य में राजा दाहिर सेन ने श्ररण दी वो लोग ही मुहम्मद बिन कासिम से मिल गये।

ओर उस भंयकर युद्ध में राजा दाहिर सेन गद्दारों की चाल में फंसकर उलझ गए।

ओर गद्दारों ने उस दुश्मन मोहम्मद बिन कासिम को मौका दे दिया कि अब रास्ता साफ है। कर दो काम तमाम।

उनकी इस गद्दारी से एक हिंदु का शासन खत्म हो गया 

वो गद्दार कोई ओर नहीं अपने ही हिंदू भाई थे जिनके नाम "मोका और रासिल"" थे

केवल धन ओर गद्दी के लिए एक ऐसे ब्राह्मण राजा को मरवा दिया जिससे पूरा अरब खोफ खाता था।

उसी युद्ध में राजा दाहिर सेन का बेटा भी शहीद हुआ। 

अगर उस युद्ध में गद्दारी नहीं होती तो आज सिंध भी शायद भारत होता ।

वो सारस्वत ब्राह्मण दाहिर सेन युद्ध हारा नहीं बल्कि गद्दारी जीत गयी।

वो लड़ा, वो भिड़ा, केवल देश ओर अपने हिंदू भाइयों के लिए।

लेकिन दुर्भाग्यवश दो लोगों ने गद्दारी करके अपना ईमान ओर धर्म बेच दिया।

सारस्वत ब्राह्मण वंश की जय हो,,,राजा दाहिर सेन अमर रहें,,,,


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