भाद्रपद महीने की शुक्ल एकादशी को,
यह धरती प्रकृति की चमक में नहा जाती है।
कर्मा पेड़ की एक टहनी लाकर,
पूरे आंगन को भक्ति से भर दो,
चलो कर्मा पूजा मनाते हैं, हे दिलों!
यह एक ऐसा त्योहार है जो भाइयों की भलाई चाहता है,
बहनों के प्यार का खजाना।
कर्म के देवता का आह्वान करते हुए,
आइए हम अनाज की भरपूरी के लिए प्रार्थना करें!
मिट्टी की खुशबू का एक हरा-भरा त्योहार,
खेलों और गीतों का एक आदिवासी उत्सव।
कर्मा पूजा नई रोशनी लेकर आई है,
आइए हम अपने सभी घरों को खुशियों और उल्लास से भर दें!
डॉ. राघवेंद्र मिश्रा एग्जीक्यूटिव एडिटर

Comments
Post a Comment