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प्रतिबंध लगाने वाले देश खुद औद्योगिक गिरावट से जूझ रहे, ब्रिक्स बिजनेस फोरम में पुतिन का पश्चिम देशों पर निशाना


नई दिल्ली(विशाखापत्तनम दर्पण समाचार)- आज दुनिया बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है, जहां पुरानी आर्थिक ताकतों की जगह नए विकास इंजन ले रहे हैं। बिजनेस-टू-बिजनेस रिलेशन और आर्थिक साझेदारी ही वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और मौजूदा हालात में ब्रिक्स ने इन संबंधों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यह बात शुक्रवार को आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम में कही।

पुत ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा, “आज यहां पर सभी की आपसी सहमति वाले व्यावसायिक संपर्क और संबंधों को मजबूत करने को लेकर बढ़ती दिलचस्पी को दिखाता है। यह जाहिर है कि एक विश्वनीय बिजनेस-टू-बिजनेस रिलेशन और आर्थिक साझेदारी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों की रीढ़ है। बिक्स ने इन संबंधों को और मजबूत करने में मदद की है। इसके साथ ही दुनिया में जो मौजूदा हालात बने हुए हैं, उसमें भी ब्रिक्स ने काफी मदद की है।”

रूस के राष्ट्रपति ने कहा, “दुनिया में बड़े संरचनात्मक और गहरे बदलाव हो रहे हैं। इसकी वजह यह है कि तथाकथित पुराने नेता, जो 20वीं सदी के दूसरे हिस्से में आर्थिक बढ़ोतरी के अगुआ थे, उनकी जगह अब विकास के नए इंजन ले रहे हैं। जब मैं ‘पुराना’ कहता हूँ तो यह सिर्फ औपचारिकता है, हम सब समझते हैं कि हम किस बारे में बात कर रहे हैं। इन तथाकथित पुराने नेताओं के पास अभी बहुत मजबूत काबिलियत और अच्छा-खासा इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी फायदे, साइंटिफिक फायदे, साइंटिफिक स्कूल वगैरह हैं। यह इंसानियत और इकोनॉमी का नेचर नहीं है। दुनिया हमेशा बदलती रहती है।”

पश्चिमी देशों पर असर साधते हुए उन्होंने कहा कि जिन देशों ने रूस के खिलाफ प्रतिबंध का दबाव शुरू किया था, वे औद्योगिक गिरावट और बजट घाटे की समस्या का सामना कर रहे हैं। वे ऐसा नहीं कर सकते। उन्हें कुछ बहुत मुश्किल बदलावों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले 5 सालों में, दुनिया की जीडीपी का 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सा ब्रिक्स देशों ने बनाया है, जहां तथाकथित जी7, द ग्रेट 7, मुझे नहीं पता कि वे इसे क्यों कहते हैं, का योगदान सिर्फ 29 फीसदी है। इसी समय में दुनिया की आर्थिक विकास की बात करें, तो हम देखते हैं कि उस बढ़ोतरी का आधे से ज्यादा हिस्सा ब्रिक्स का रहा है, जबकि जी7 का हिस्सा सिर्फ 18 फीसदी रहा है। ऐसा क्यों है? जवाब आसान है, ब्रिक्स देशों में दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी रहती है और इसीलिए, उनके पास एक बहुत अच्छा, तेजी से बढ़ने वाला, घरेलू बाजार है।”

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