बच्चों... बदलाव की शुरुआत आपसे होनी चाहिए।आपको बचपन में ही कुछ अच्छी बातें सीखने की कोशिश करनी चाहिए। बड़ों और टीचरों की बातें इसमें मददगार होती हैं.. यही इस सदी का नैतिक नियम है...!”
*‘आपका गुस्सा आपका दुश्मन है...’ यह कहावत जो हम अभी सीख रहे हैं, वह सुमति शतकम से है। हमारा गुस्सा ज़्यादातर हमें नुकसान पहुँचाता है, अगर हम शांत रहें, तो हम जो सीख रहे हैं उस पर ध्यान लगा सकते हैं। अगर कोई मुसीबत में हो तो हमें उसकी मदद करने की सोच बनानी चाहिए...!’ बडेना कहते हैं कि हमारी खुशी ही हमारा स्वर्ग है, हमारा दुख ही हमारा नर्क है।
*पोटाना कुछ कहते हैं... “जो कोई भी दुनिया को भरपूरी की जगह के तौर पर देखता है, उसे फैलाए बिना, उस तक पहुँचे बिना, देखे बिना *यानी...जो थोड़ा भी मिले, उसे दस हज़ार समझकर संतुष्ट हो जाना चाहिए। जो ऐसे संतुष्ट नहीं होते, उन्हें सात द्वीपों की दौलत भी मिल जाए, तो भी वे संतुष्ट नहीं होंगे....वे कहते हैं।
*'मेरे माता-पिता हैं जो मुझसे प्यार करते हैं, मेरे अच्छे दोस्त हैं।
*मैं एक अच्छे स्कूल में पढ़ रहा हूँ। मेरे अच्छे टीचर हैं..तो, हमें जो हमारे पास है उसमें अच्छाई सोचनी चाहिए और अपनी कोशिश और अपनी प्रैक्टिस ईमानदारी से करनी चाहिए। अगर हम ऐसा नहीं करते, यानी जो हमारे पास है उसमें अच्छाई देखे बिना...जो हमारे पास नहीं है, क्या होगा अगर हम हर पल बैठकर रोते रहें, यह याद करते हुए कि हमारे पास क्या नहीं है? अच्छा समय बीत जाएगा।
*जो हमेशा बिज़ी रहता है और अपने पास जो समय है उसे बर्बाद करता है, उसे भगवान भी नहीं बचा सकते।
*यह आपका मन है जो आपको खुश या दुखी रखता है। इसे कंट्रोल करें, इसे वह बताएं जो आपको पसंद है। यह आप नहीं सुन रहे हैं, बल्कि इसे अपनी बात सुनाने दें। यह आपके हाथ में है। यह दूसरों की वजह से मुमकिन नहीं है।
*अगर आप ऐसा सोचते हैं और हमेशा खुश रहते हैं, खुश रहते हैं और अच्छे काम करते हैं, तो वही आपके लिए स्वर्ग है।
*मैं आपको एक राज़ बताता हूँ। जिस स्वर्ग की हम सब बात करते हैं, वह हमेशा रहने वाला नहीं है..! हालाँकि यह सच है कि हम अपने अच्छे कामों की वजह से स्वर्ग पहुँचते हैं... यह तभी तक है जब तक हमारे अकाउंट में पुण्य है!
*जैसे ही वह खत्म होता है... हम गिर जाते हैं। लेकिन यहाँ आपको यह इंसानी जन्म मिला है... अगर आप इस जन्म को उस किस्मत की वजह से कामयाब बनाना चाहते हैं जो 84 लाख जीवों में से किसी को नहीं मिली... अगर आपको जो मिला है उससे आप खुश हैं... अगर आप हमेशा खुश रहते हैं... अगर आप अपनी बाकी ज़िंदगी ऐसे ही रह सकते हैं... तो ऐसा है जैसे आपको यहीं स्वर्ग के सुख मिल गए हैं।
*नहीं तो, अगर आप बैठकर यह सोचकर रोते हैं कि मेरा दोस्त अच्छे नंबरों से पास हो रहा है, मैं नहीं हो सकता... तो ऐसा है जैसे आपने अपना नर्क खुद बनाया है, भगवान ने नहीं।
*अगर आप ज़िंदगी भर खुश रहना चाहते हैं और अपने दोस्त को सरस्वती का आशीर्वाद देना चाहते हैं कृपा.. मेहनत करो और अच्छे से पढ़ाई करो।
*इस जीवन में जो ज्ञान तुमने पाया है, उसे दस लोगों के साथ बांटो, ज़रूरतमंदों की जितनी हो सके मदद करो। हमेशा जोश में रहो। अगर तुम फेल हो गए हो... तो इतने निराश मत हो कि दुनिया उलट-पुलट हो जाए...
*'अब्दुल कलाम ने कहा.. F.A.I.L.. फेल का मतलब है सीखने में पहली कोशिश... यानी, उन्होंने कहा, सीखने की पहली कोशिश.. अब तुम्हें क्या करना चाहिए.. दूसरी कोशिश। लगन और कॉन्सन्ट्रेशन से हासिल करो... इसके अलावा, जो स्वर्ग तुमने अपनी हथेली में बनाया है, उसे नीचे मत धकेलो और अपने हाथों से नर्क मत बनाओ!'
-ब्रह्मा श्री चागंती कोटेश्वर राव.
आध्यात्मिक प्रवचन कर्ता

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