आसमान की सड़क पर खूबसूरती का चांद,
आज रात सोलह कलाओं से मुस्कुराया!
पतझड़ की लाई हुई पवित्र चांदनी,
धरनी पर अमृत की धारा की तरह उठी!
करोड़ों तारों के बीच बैठा चांद,
पूरी दुनिया को ब्रह्मांड की चमक से भर दिया।
दूधिया पर्दे जैसी उस सफेद रोशनी में,
प्रकृति आनंद से चमक उठी!
यह वह पवित्र समय है जब देवी लक्ष्मी चलती हैं,
कोजागरी की ध्वनि से धन्य होने वाली एक पवित्र रात!
आइए चांदनी में थोड़ी देर अपने मन को हल्का करें,
और परमात्मा की लीला को याद करें!
अमृत किरणों की यह शरद पूर्णिमा,
सभी का घर सुख और शांति की चमक से भर जाए!
के· वी· शर्मा
संपादक
विशाखा संदेशम
विशाखापत्तनम दर्पण
विशाखापट्टनम
आंध्र प्रदेश
दूरभाष7075408286

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