भाद्रपद महीने के अंधेरे पर्दे में,
यही है पितरों की सेवा जो भक्ति के लायक है!
आस्था की अमिट रोशनी का पानी,
हमारे पितरों का घर बहता है। [1, 2]
करुणा की अनदेखी मूरतें,
दया करने वाले हमारे पुराने पुरखे।
अविस्मरणीय भक्ति की धाराएं,
आइए इस समय अपने मन से नापें। [1, 2]
जैसे कौवे भूख मिटाने के लिए,
मेहमान बनकर हमारे आंगन में आते हैं!
बड़ों का आशीर्वाद स्वीकार होता है,
पूरा परिवार खुशियों से भर जाता है। [1]
यही वह समय है जब अतीत के बंधन भुलाए नहीं जाते,
यही वह पवित्र पखवाड़ा है जिसे मैंने अलग रखा है!
पितरों का कर्ज चुकाने के इस शुभ दिन पर,
सभी जीवन में शांति मिलती है।
के.वी. शर्मा द्वारा रचित, संपादक विशाखा संदेश और विशाखापत्तनम दर्पण समाचार पत्रिका विशाखापत्तनम सेल नंबर 7076408286

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