रात में होने वाली बारिश,
मन को एक मीठा सा एहसास।
अंधेरे को चीरती हुई गिरती बारिश की बूंदें,
खामोशी में सुनाई देती कुदरत की आवाज़ें।
जैसे आसमान से बरसता अमृत,
ज़मीन को छूती हर बूंद एक कविता जैसी।
खिड़की के पास बैठकर,
जब पुरानी यादें मेरी आँखों के सामने घूमती हैं,
ठंडी हवा सुकून देती है,
क्या यही इस रे के लिए असली साई नहीं है।
मिट्टी की खुशबू आती है,
एक नया जोश जो दिल में भर देता है।
आज रात बारिश ज़ोरों से हो रही है,
सोती हुई दुनिया को खींच रही है।
के ·वी· शर्मा
संपादक
विशाखा संदेशम
विशाखापट्टनम दर्पण समाचार पत्रिका
विशाखापत्तनम आंध्र प्रदेश

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