1.हवाओं की गर्जना जो चलती है,
लहरों की गर्जना जो तबाही मचाती है।
अर्बनब की कोख से पैदा हुआ तूफ़ान,
कुदरत की शान दिखाता है!
लहरों का उछाल जो आसमान को छूता है,
गर्जन की गर्जना जो चारों तरफ़ गूंजती है।
किनारे पर बाढ़ जो लाती है,
दिल में डर और थरथराहट पैदा करती है!
इंसानी ताकत से परे एक रूप,
कुदरत का कहर जो तबाही से हम पर बरसा है।
शांत रहो, हे महान सागर,
हम पर रहम करो, हे बादल
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2.तूफ़ान का आभास.. अर्नब तूफ़ान!
सड़क पर गाड़ियों के बादल उमड़ रहे हैं,
कदली की गोद में कोहराम मचा है!
विलयम 'अर्नब' कहते हुए डूब गया,
हर पल किनारा पार करने की कोशिश कर रहा है!
सागर ज़ोरों से कांप रहा है,
हवा की रफ़्तार में तूफ़ान का आभास छिपा है!
आसमान से मूसलाधार बारिश हो रही है,
दिल बेचैन है कि घोंसले को न छेड़ दूं!
लहरों के टकराने से समंदर अशांत है,
यही समय है सावधान रहने का!
कुंवारी प्रकृति को प्रणाम करते हुए,
आइए सुरक्षित रहें.. एक दूसरे के साथ खड़े रहें
: के ·वी· शर्मा संपादक विशाखा संदेशम एवं विशाखापट्टनम दर्पण समाचार पत्रिका विशाखापत्तनम आंध्र प्रदेश

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