आरोग्य, सुख, शांति और समृद्धि का पावन संदेश देने वाला पर्व
धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है, दीपावली के पाँच दिवसीय पर्व का प्रथम दिन है। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। यह पर्व भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और समृद्धि का प्रतीक है।धनतेरस के पावन अवसर पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। इसलिए यह दिन स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। भगवान कुबेर धन के देवता हैं, जबकि माता लक्ष्मी सुख, वैभव और समृद्धि की प्रतीक हैं।
*धनतेरस की पूजा और परंपराएँ*
धनतेरस के दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करके सुंदर सजावट करते हैं। घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाई जाती है तथा दीपक जलाकर वातावरण को पवित्र और आनंदमय बनाया जाता है। इस दिन सोना, चाँदी, बर्तन तथा अन्य नई वस्तुएँ खरीदने की परंपरा भी प्रचलित है।संध्या के समय भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। अनेक परिवारों में यमराज के नाम से यमदीप जलाने की परंपरा भी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दीपक को जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इसके अतिरिक्त जरूरतमंदों को दान देना और सेवा कार्य करना भी इस पर्व की पवित्र भावना को प्रकट करता है।
*धनतेरस का वास्तविक संदेश*
धनतेरस हमें यह संदेश देता है कि सच्ची संपत्ति केवल पैसा, सोना या भौतिक धन नहीं है। अच्छा स्वास्थ्य, संतोष, सदाचार, परिवार का प्रेम, मानवता और अच्छे संस्कार ही जीवन की अनमोल पूँजी हैं। भौतिक समृद्धि के साथ-साथ मानसिक शांति और आध्यात्मिक सुख भी जीवन में समान रूप से आवश्यक हैं।यह पावन पर्व हमें स्वच्छता, श्रद्धा, सकारात्मकता, दान और परोपकार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। धनतेरस के दीपक का प्रकाश केवल घर को ही नहीं, बल्कि हमारे जीवन और अंतर्मन को भी प्रकाशित करता है।
आइए, इस धनतेरस पर हम सभी यह प्रार्थना करें कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में आरोग्य, सुख, शांति, प्रेम और समृद्धि का प्रकाश फैले।
धनतेरस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ!
डॉ. शैलेष वाणिया ‘शैल’राष्ट्रीय अध्यक्ष खंभोलज साहित्य सेवा संस्थाआणंद, गुजरात

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